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नवजातों की जान बचाने में ‘पोकस’ बनेगा वरदान, सुशीला तिवारी अस्पताल में : विशेषज्ञों ने सिखाई अत्याधुनिक तकनीक

Abid Hussain

Thu, Apr 16, 2026

हल्द्वानी।  सुशीला तिवारी अस्पताल में प्वाइंट ऑफ केयर अल्ट्रासाउंड (पोकस) विषय पर एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ चिकित्सा शिक्षा निदेशक डॉ. अजय आर्या, मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. जी.एस. तितियाल, चिकित्साअधीक्षक डॉ. अरुण जोशी, बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. ऋतु रखोलिया सहित अन्य वरिष्ठ चिकित्सकों ने दीप प्रज्वलित कर किया।

कार्यशाला में देश के विभिन्न हिस्सों से आए विशेषज्ञों—डॉ. प्रदीप सूर्यवंशी (पुणे), डॉ. गायत्री मुराजकर (मुंबई), डॉ. हंस वैश (देहरादून) और डॉ. चिन्मय चेतन (जॉली ग्रांट मेडिकल कॉलेज, देहरादून)—ने पोकस तकनीक के उपयोग और उसके लाभों पर विस्तार से जानकारी दी।

डॉ. ऋतु रखोलिया ने बताया कि फंक्शनल अल्ट्रासाउंड के माध्यम से नवजात शिशुओं के मस्तिष्क, छाती, फेफड़े, हृदय और पेट से जुड़ी गंभीर बीमारियों का त्वरित निदान संभव है। इस तकनीक की विशेषता यह है कि इसमें विकिरण का कोई खतरा नहीं होता और जांच मशीन को सीधे शिशु के बिस्तर तक ले जाकर परीक्षण किया जाता है, जिससे समय पर उपचार सुनिश्चित हो पाता है।

उन्होंने कहा कि पोकस तकनीक अत्यंत गंभीर नवजात शिशुओं के लिए वरदान साबित हो रही है और विकसित देशों के साथ-साथ भारत के बड़े शहरों में इसका सफल उपयोग किया जा रहा है। इस पहल के बाद उत्तराखंड में भी निकट भविष्य में इस तकनीक के व्यापक उपयोग की उम्मीद है, जिससे नवजात शिशु मृत्यु दर में कमी लाई जा सकेगी।

कार्यशाला में उत्तराखंड के विभिन्न जनपदों से आए 42 चिकित्सकों ने प्रतिभाग किया और तकनीक के व्यावहारिक पहलुओं को समझा।

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