Sat 24 Oct 2026

ब्रेकिंग

डॉ. देवी दत्त जोशी ने केंद्र सरकार के समक्ष रखा प्रस्ताव,

शिविर फार्मर रजिस्ट्री से जुड़ी समस्याओं का होगा समाधान

मिसाल, वन विभाग व स्वास्थ्य सेवाओं को दी बड़ी सौगात

अब राह होगी आसान

टनकपुर में विधिक सेवा प्राधिकरण ने किया जागरूक

सुचना

घुमंतू युवाओं को कृषि, गौपालन और स्वरोजगार से जोड़ने का सुझाव : डॉ. देवी दत्त जोशी ने केंद्र सरकार के समक्ष रखा प्रस्ताव,

Abid Hussain

Sat, Oct 24, 2026


घुमंतू युवाओं को कृषि, गौपालन और स्वरोजगार से जोड़ने का सुझाव

डॉ. देवी दत्त जोशी ने केंद्र सरकार के समक्ष रखा प्रस्ताव, 

शिक्षा के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण पर दिया जोर

टनकपुर, चम्पावत। घुमंतू परिवारों के बच्चों और युवाओं को शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण तथा स्वरोजगार से जोड़ने के साथ ही बेसहारा गोवंश के संरक्षण के लिए समन्वित प्रयास किए जाने की आवश्यकता है। टनकपुर निवासी डॉ. देवी दत्त जोशी ने इस दिशा में कृषि शिक्षा, जैविक खेती, गौपालन और कृषि आधारित उद्योगों को प्रोत्साहित करने संबंधी प्रस्ताव प्रस्तुत किया है।

डॉ. जोशी के अनुसार, विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए शिक्षा के साथ-साथ युवाओं को रोजगारपरक कौशल उपलब्ध कराना भी जरूरी है। उन्होंने शिक्षा से वंचित बच्चों तथा माध्यमिक स्तर पर पढ़ाई छोड़ने वाले विद्यार्थियों की स्थिति का सर्वेक्षण कराने और उनके लिए पुनः शिक्षा से जुड़ने के अवसर विकसित करने पर जोर दिया।

कृषि शिक्षा को बढ़ावा देने का सुझाव

डॉ. जोशी ने छात्रावास की सुविधा वाले कृषि इंटर कॉलेज और प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने का सुझाव दिया। उनका कहना है कि ऐसे संस्थानों में युवाओं को जैविक खेती, फसल उत्पादन, सब्जी उत्पादन, पशुपालन और कृषि आधारित स्वरोजगार का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा सकता है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

30 हजार गौशालाओं की स्थापना का प्रस्ताव

डॉ. जोशी ने लगभग 30 हजार गौशालाओं के साथ कृषि प्रशिक्षण केंद्र विकसित करने की संभावित योजना पर विचार करने की अपील की। प्रस्ताव के अनुसार, इन केंद्रों के माध्यम से इच्छुक युवाओं और घुमंतू परिवारों को गौपालन तथा कृषि आधारित गतिविधियों से जोड़ने की व्यवस्था की जा सकती है।

उन्होंने कहा कि गोवंश के संरक्षण के लिए केवल गौशालाओं की स्थापना ही नहीं, बल्कि उनके व्यवस्थित संचालन, चारे, चिकित्सा और देखभाल की समुचित व्यवस्था भी आवश्यक है। साथ ही गोबर से जैविक खाद तथा अन्य उपयोगी उत्पाद तैयार करने का प्रशिक्षण देकर स्वरोजगार की संभावनाएं विकसित की जा सकती हैं।

पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक के समन्वय पर जोर

डॉ. जोशी ने शिक्षा में भारतीय ज्ञान परंपरा, स्थानीय कृषि अनुभव और आधुनिक विज्ञान के समन्वय की आवश्यकता भी जताई। उनका मानना है कि युवाओं को केवल प्रमाणपत्र तक सीमित रखने के बजाय उन्हें व्यावहारिक दक्षता, आत्मनिर्भरता और सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ना चाहिए।

उन्होंने केंद्र सरकार, राज्य सरकार, प्रशासन और स्वयंसेवी संस्थाओं से इस दिशा में संभावनाओं का अध्ययन कर व्यवहारिक योजना तैयार करने का आग्रह किया। उनके अनुसार, यदि शिक्षा, कौशल विकास, कृषि और गोवंश संरक्षण के प्रयासों को प्रभावी ढंग से जोड़ा जाए तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और रोजगार के नए अवसर सृजित करने में सहायता मिल सकती है।

Tags :

अच्छी पहल

जरूरी खबरें