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तीन लाख की आबादी की धड़कन बने डॉ. के.के. पुनेठा : सटीक इलाज और मानवीय संवेदनाओं की वजह से मरीज देखते हैं ‘भगवान का रूप’

Abid Hussain

Sun, Dec 7, 2025

तीन लाख की आबादी की धड़कन बने डॉ. के.के. पुनेठा

कहीं भी जाने के ऑफर ठुकराकर लोहाघाट में दे रहे जनसेवा का दुर्लभ उदाहरण।

दिल्ली–मुंबई के लाखों के पैकेज छोड़े, कहा—“मेरे लोग, मेरे माता-पिता की आत्मा ने मुझे यहीं सेवा के लिए भेजा है”

जिले में अकेले हृदय रोग विशेषज्ञ, सटीक इलाज और मानवीय संवेदनाओं की वजह से मरीज देखते हैं ‘भगवान का रूप’

डॉक्टर के के पुनेठा – एक नाम, एक भरोसा… और तीन लाख लोगों का संबल।

लोहाघाट। जहां लोहाघाट और आसपास की लगभग तीन लाख की आबादी के लिए डॉ. के.के. पुनेठा सिर्फ एक डॉक्टर नहीं, बल्कि उम्मीद की आखिरी किरण बन चुके हैं।

जिले में जब हार्ट के स्पेशलिस्ट का नाम लिया जाता है, तो जनता का दिल सिर्फ एक ही नाम पर टिक जाता है—डॉ. पुनेठा। दिल्ली, मुंबई जैसे महानगरों से इन्हें लाखों रुपये तक के पैकेज ऑफर होते रहे, लेकिन उन्होंने हर बार एक ही जवाब दिया “मेरे लोग यहां हैं, मेरा फर्ज यहां है… मैं इन्हें छोड़कर कहीं नहीं जा सकता।” डॉ. पुनेठा के ताऊजी स्वर्गीय हरिकृष्ण पुनेठा स्वयं एक मानवीय संवेदनाओं से भरे व्यक्ति थे। लोगों के दुख दूर करने का उनका तरीका, उनकी करुणा और सेवा-भाव ने उन्हें क्षेत्र में एक अलग पहचान दिलाई थी।

डॉ. पुनेठा आज भी कहते हैं “मेरे ताऊजी ने मुझे लोगों की सेवा करने के लिए ही इस धरती पर भेजा था।” उन्हीं की प्रेरणा से आज डॉ. पुनेठा हर मरीज के चेहरे पर मुस्कान देखकर खुद को धन्य समझते हैं। चंपावत जिले में आज भी न सरकारी अस्पतालों में, न निजी अस्पतालों में

हार्ट स्पेशलिस्ट उपलब्ध है। ऐसे में डॉ. पुनेठा का होना लोगों के लिए वरदान से कम नहीं।

दिल की बीमारी, हाई BP, ब्लॉकेज जैसी गंभीर परिस्थितियों में डॉ. पुनेठा को लोग भगवान का दूसरा रूप मानने लगते हैं। जहां बड़े महानगरों में वही परामर्श, वही जांच, वही उपचार लाखों रुपये में होता है, वहीं डॉ. पुनेठा मामूली फीस में वही सुविधा प्रदान करते हैं।

कई मरीज बताते हैं “दिल्ली में जिन दवाओं और टेस्टों में हजारों लगते, वही इलाज यहां डॉ. साहब बेहद कम खर्च में कर देते हैं।” डॉ. पुनेठा की सबसे बड़ी पहचान उनका मानवीय जज्बा है। कई बार वे फीस नहीं लेते, दवाएं खुद दिलवा देते हैं, हार्ट अटैक के मरीजों को रात–रातभर जागकर संभालते हैं। कई परिवार आज भी कहते हैं “अगर डॉ. पुनेठा न होते तो हमारा कोई अपना आज जिंदा न होता।” सैकड़ों गांवों के लोग आज भी उन्हें केवल डॉक्टर नहीं, परिवार का सदस्य मानते हैं।

हार्ट के मरीजों में तो उनकी ऐसी पहचान है कि “डॉ. पुनेठा हैं, तो हम सुरक्षित हैं।” डॉ. पुनेठा का यह जज्बा और समर्पण सिर्फ एक डॉक्टर की कहानी नहीं, बल्कि एक संदेश है कि यदि चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े हर व्यक्ति में ऐसी मानवीय संवेदनाएं आ जाएं, तो गरीबों को भी जीवन देखने का एक और मौका मिल सकता है।

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