स्पष्टीकरण के अगले ही दिन सस्पेंशन, क्या सवाल उठाने की मिली सज़ा? : मामला बना चर्चा का विषय
Abid Hussain
Fri, Feb 6, 2026
टनकपुर। रोडवेज डिपो में चालक विनोद पाठक के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है।बताया जा रहा है कि 03 फरवरी 2026 को सोशल मीडिया पर विभागीय अव्यवस्थाओं और ड्यूटी से जुड़ी समस्याओं को उजागर करने के बाद वरिष्ठ स्टेशन प्रभारी द्वारा चालक से स्पष्टीकरण मांगा गया।
लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि स्पष्टीकरण का समय पूरा होने से पहले ही 04 फरवरी 2026 को चालक विनोद पाठक को निलंबित कर दिया गया।
सूत्रों के अनुसार, चालक ने संचालन कक्ष में कार्यरत लिपिक पर ड्यूटी न देने और बिना अवकाश पत्र के उपस्थिति पंजिका में एंट्री किए जाने जैसे गंभीर आरोप सोशल मीडिया और पत्रकारों के माध्यम से उजागर किए थे। विभाग का कहना है कि इससे निगम की छवि धूमिल हुई, जबकि कर्मचारियों का पक्ष है कि जब अंदर शिकायत पर सुनवाई नहीं हुई तो मजबूरी में मामला सार्वजनिक करना पड़ा।
अब बड़ा सवाल यह खड़ा हो रहा है कि
जब स्पष्टीकरण के लिए 03 दिन का समय दिया गया था,
तो फिर अगले ही दिन निलंबन की कार्रवाई क्यों की गई?
क्या यह कार्रवाई नियमों के तहत है या फिर आवाज़ उठाने वाले कर्मचारी को दबाने की कोशिश?
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि यह मामला प्रतिशोधात्मक कार्रवाई का प्रतीक है और यदि निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो आंदोलन की राह भी अपनाई जा सकती है। फिलहाल पूरा मामला उच्च अधिकारियों तक पहुंच चुका है और निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या जांच निष्पक्ष होगी या सवाल पूछने की कीमत चुकानी पड़ेगी?
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