: वर्तमान हालातो को देखते हुए देश को चलाने वाले राजनेताओं का शिक्षित होना जरूरी■ कैप्टन (भानी चंद)
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Mon, Nov 18, 2024
टनकपुर/ बनबसा= शिक्षा का जीवन में बहुत महत्व है। जिस प्रकार गाड़ी चलाने के लिए ड्राइविंग लाइसेंस होना चाहिए। उसी तरह देश की गाड़ी चलाने के लिए शिक्षित होना भी जरूरी है। चाहे वह गांव का सरपंच हो या फिर विधायक सांसद या पार्षद ही क्यों ना हो, यही सांसद मंत्री बनकर देश की बागडोर अपने हाथ में लेकर विकास कार्य में सक्षम होंगे। इस संबंध में गौरव सेनानी कल्याण समिति के अध्यक्ष कैप्टन भानी चंद ने कहा की संविधान मे संशोधन की आवश्यकता है। देश के विधायकों - सांसदों के चुनाव लड़ने के लिए जो मानक 1947 में देश आजाद होते समय बनाए गए थे। उसमें आज तक कोई संशोधन नहीं हुआ है। जबकि वर्तमान हालातों को देखते हुए देश को चलाने वाले विधायकों सांसदों और जनप्रतिनिधियों का चुनाव लड़ने के लिए कुछ मानक तय करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि विधायक और सांसद कम से कम सीनियर सेकेंडरी या ग्रेजुएट होने चाहिए। क्योंकि पढ़े-लिखे आदमी की सोच से देश तरक्की की राह पर अग्रसर रहेगा। शिक्षा के साथ स्वभाव पर अच्छा असर रहता है। वह व्यक्ति लोगों से मिलनसार समाज के प्रति व सभी धर्म के प्रति तथा जात-पात में विश्वास न रखने में विश्वास रखता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा हमारे जीवन का श्रृंगार है। जब पढ़ा लिखा पार्षद, सांसद, या मंत्री होगा तो पूरे विश्व में हमारा नेतृत्व करना आसान होगा। पढ़ा लिखा नेता ही देश को प्रगति के पद पर ले जा सकता है। साथ ही उन्होंने कुछ और सुझाव भी दिए हैं जैसे की नेता बनने के लिए फिजिकल मेडिकल साइकोलॉजी टेस्ट में पास, पारिवारिक आपराधिक पृष्ठभूमि का ना हो, यदि तीन बार चुनाव हार जाता है तो एसे व्यक्तियों को आगे चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध हो, कम से कम 5 वर्ष सेना में सेवारत रह चुका हो, आदि सुझाव दिए हैं
मीडिया से मुखातिब होते हुए श्री चंद ने कहा कि सांसद विधायक या सरपंच जब शिक्षित होंगे तब विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका में आपसी सामंजस्य बना रहेगा। और कहा कि राजस्थान टोंक में जिस तरह से एक निर्दलीय प्रत्याशी ने एक प्रशासनिक अधिकारी के ऊपर हमला किया था उस तरह की घटनाएं नहीं होगी।
सदन में भी हंगामे नहीं होंगे। जिस तरह से कार्यपालिका के अंदर उच्च शिक्षित अधिकारी होते हैं। इस तरह विधायकी मे भी उनके समक्ष शिक्षित स्वच्छ विधायक और सांसद और जनप्रतिनिधि मौजूद रहेंगे। राजनीति में परिवारवाद से भी बहुत हद तक छुटकारा मिल जाएगा।
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