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: पिथौरागढ़ में टेरिटोरियल आर्मी की भर्ती पैदा कर गई कई सवाल, युवाओं की अपत्याशित भीड़ के सामने बौने पड़े सब इंतजाम

admin

Wed, Nov 20, 2024

■■ भविष्य में होने वाली भर्तीयों के लिए आंख खोल रही है इस भर्ती नजारा

चंपावत।( गणेश दत्त पांडे ) पिथौरागढ़ में टेरिटोरियल आर्मी की भर्ती के लिए यूपी समेत मध्य प्रदेश, बिहार आदि राज्यों से युवाओं को बुलाने का निर्णय कई दुखद सवाल छोड़ गया है। मैदानी क्षेत्र के युवाओं को ऐसे क्षेत्र में भर्ती के लिए ऐसे समय बुलाया गया जब ठंड पूरे योवन पर आ गई है। जहां उन्हें न तो ठौर ठिकाना मिला ओर न ही आने जाने के साधन। टनकपुर तक युवाओं को आने में ज्यादा दिक्कत नहीं हुई लेकिन टनकपुर से पिथौरागढ़ तक 150 किलोमीटर लंबा सफर तय करना उन्हें जीवन के काफी कटु अनुभव दे रहा है। फौज के अनुशासित जीवन में प्रवेश करने वाले युवाओं ने सड़क जाम करके पुलिस व प्रशासन के लिए जो समस्याएं पैदा कर दी थी वह उनकी मजबूरी हो सकती है।

पुलिस व प्रशासन ने उन्हें पिथौरागढ़ पहुंचने के लिए अपने स्तर से सभी इंतजाम किए थे। लेकिन युवाओं की अप्रत्याशीत भीड़ को देखते हुए यह इंतजाम बौने पड़ गए। जो युवा जैसे-तैसे पिथौरागढ़ पहुंचे उन्हें वहां रात गुजारने के लिए कोई ठोर ठिकाना नहीं मिल पाया यही हाल टनकपुर का भी था। जहां से युवाओं ने पिथौरागढ़ के लिए पैदल मार्च करना शुरू कर दिया। सड़क मार्ग में जो भी वाहन मिला उन्होंने मनमाना किराया लेकर उन्हें लिफ्ट दी। कई युवा जैसे तैसे चंपावत तक पहुंचे उसके बाद उन्हें आगे बढ़ने के लिए खूब पापड़ बेलने पड़े।


दरअसल मैदानी क्षेत्र यानी विभिन्न राज्यों के युवाओं को भर्ती के लिए पिथौरागढ़ बुलाना एक अव्यवहारिक निर्णय रहा है। सेना के लोगों ने भर्ती करने से पूर्व या तो पुलिस व प्रशासन से संपर्क नहीं किया या किसी को इतनी उम्मीद नहीं थी कि इतने युवा भर्ती के लिए जाएंगे। और जीवन में कभी न भूलने वाली यादे अपने साथ ले जाएंगे। युवाओं ने टनकपुर में ऐसी समस्या पैदा कर दी जिसके लिए स्वयं एसपी अजय गणपति को मोर्चा संभाला पड़ा। हालांकि उनके द्वारा युवाओं को समझाने बुझाने की कोशिश कर इस भीड़ को थोड़ा काबू में लाने का प्रयास किया गया तथा पुलिस द्वारा बिहार के दानापुर में 26 नवंबर से 1 दिसंबर तक पुनः भर्ती शुरू होने की सूचना दिए जाने के बाद तमाम युवक वहां के लिए लौट गए।

टनकपुर में तो एक समय ऐसी स्थिति पैदा हो गई जिसमें पुलिस को हल्का बल प्रयोग करने की नौबत भी आ गई। युवाओं का कहना था की भर्ती के लिए ऐसा रोस्टर बनाया जाना चाहिए था जिससे आसानी से आने जाने तथा उन्हें रहने का ठौर ठिकाना मिल जाता।

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