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एनएच चौड़ीकरण में बाईपास की मांग तेज, प्रभावितों ने दी जनआंदोलन की चेतावनी

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विशेष खबर : एनएच चौड़ीकरण में बाईपास की मांग तेज, प्रभावितों ने दी जनआंदोलन की चेतावनी

Abid Hussain

Thu, May 14, 2026

एनएच चौड़ीकरण में बाईपास की मांग तेज, प्रभावितों ने दी जनआंदोलन की चेतावनी

होटल लक्ष्य में हुई बैठक, नितिन गडकरी, अजय टम्टा और मुख्यमंत्री के नाम भेजा ज्ञापन

टनकपुर। राष्ट्रीय राजमार्ग चौड़ीकरण को लेकर टनकपुर और बनबसा क्षेत्र में अब विरोध के स्वर तेज होने लगे हैं। एनएच चौड़ीकरण से प्रभावित क्षेत्रवासियों ने बुधवार को टनकपुर स्थित होटल लक्ष्य में बैठक आयोजित कर बनबसा से ककराली गेट पार तक बाईपास अथवा एलिवेटेड रोड निर्माण की मांग को लेकर रणनीति तैयार की। बैठक में चेतावनी दी गई कि यदि सरकार ने जनहित को देखते हुए जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो व्यापक जनआंदोलन शुरू किया जाएगा।

बैठक में वक्ताओं ने कहा कि टनकपुर–बनबसा क्षेत्र लंबे समय से भारी यातायात दबाव झेल रहा है। यह मार्ग न केवल स्थानीय लोगों की आवाजाही का मुख्य साधन है, बल्कि पूर्णागिरी धाम आने वाले लाखों श्रद्धालुओं का प्रमुख मार्ग भी है। ऐसे में बिना बाईपास के केवल सड़क चौड़ीकरण करने से स्थानीय आबादी, व्यापार और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

बैठक में मौजूद लोगों ने कहा कि एन एच चौड़ीकरण के तहत भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होने के बाद प्रभावित परिवारों में चिंता और आक्रोश बढ़ गया है। उनका कहना है कि सड़क चौड़ीकरण से छोटे किसानों की कृषि भूमि प्रभावित होगी, कई परिवारों के मकान टूटने की स्थिति बन जाएगी और वर्षों से संचालित छोटे व्यवसाय समाप्त होने के कगार पर पहुंच जाएंगे।

वक्ताओं ने कहा कि ककराली गेट से बनबसा तक का क्षेत्र अत्यधिक घनी आबादी वाला है। इस मार्ग पर दर्जनों निजी और सरकारी विद्यालय स्थित हैं, जिनमें अध्ययनरत करीब 10 हजार विद्यार्थी प्रतिदिन आवागमन करते हैं। इसके अलावा टनकपुर और बनबसा बाजारों से प्रतिदिन लगभग 15 हजार यात्रियों की आवाजाही होती है। ऐसे में भारी वाहनों और बढ़ते ट्रैफिक के बीच दुर्घटनाओं की आशंका भी लगातार बनी रहती है।

बैठक में यह मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया कि पूर्णागिरी धाम में प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। श्रद्धालु पैदल, डोला, टैक्सी और निजी वाहनों के माध्यम से इसी मार्ग का उपयोग करते हैं। धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस क्षेत्र में सुरक्षित एवं व्यवस्थित यातायात व्यवस्था के लिए बाईपास अथवा एलिवेटेड रोड बेहद आवश्यक है।

क्षेत्रवासियों ने सवाल उठाया कि जब देश के अधिकांश छोटे और बड़े शहरों में ट्रैफिक दबाव कम करने के लिए बाईपास बनाए जा रहे हैं, तो टनकपुर–बनबसा जैसे संवेदनशील और धार्मिक महत्व वाले क्षेत्र को इस सुविधा से क्यों वंचित रखा जा रहा है।

बैठक में यह भी बताया गया कि इससे पूर्व समाजसेवी दीप पाठक द्वारा उपजिलाधिकारी पूर्णागिरी के माध्यम से केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, सांसद अजय टम्टा और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को ज्ञापन भेजकर बाईपास अथवा एलिवेटेड रोड निर्माण की मांग की जा चुकी है। बावजूद इसके अब तक कोई ठोस पहल सामने नहीं आई है।

बैठक के बाद सभी प्रभावित तहसील पहुंचे और तहसील प्रशासन के माध्यम से केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, सांसद अजय टम्टा तथा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नाम ज्ञापन प्रेषित किया।

प्रभावितों ने स्पष्ट कहा कि यदि सरकार ने जनभावनाओं और जनसुरक्षा को नजरअंदाज किया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। बैठक में क्षेत्र के कई व्यापारी, किसान, सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे। ज्ञापन में सामाजिक कार्यकर्ता दीप चंद्र पाठक, महेश सिंह देउपा, मुन्नी जोशी, विकास कुमार, अनुराग जोशी, राम सिंह कुवंर, भावित भट्ट, दिनेश चंद्र भट्ट, कैलाश भट्ट सहित दो दर्जन से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हैं।

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