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SC/ST शिक्षक एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री को भेजा 19 सूत्रीय मांग पत्र, : सामाजिक न्याय व शिक्षकों के हितों पर उठाई आवाज

Abid Hussain

Wed, May 27, 2026

टनकपुर/चम्पावत। अनुसूचित जाति-जनजाति शिक्षक एसोसिएशन उत्तराखंड, जनपद चम्पावत द्वारा मुख्यमंत्री उत्तराखंड को 19 सूत्रीय मांगों से संबंधित ज्ञापन प्रेषित किया गया। यह ज्ञापन उपजिलाधिकारी टनकपुर के माध्यम से भेजा गया, जिसमें शिक्षकों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों तथा सामाजिक न्याय से जुड़े विभिन्न मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया है।

एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष मोहन लाल सोनियाल एवं जिला मंत्री सुरेश प्रसाद विश्वकर्मा के नेतृत्व में दिए गए ज्ञापन में कहा गया कि प्रदेशभर में शिक्षकों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों, अभिभावकों एवं सामाजिक प्रतिनिधियों के साथ व्यापक संवाद और क्षेत्रीय समीक्षा के बाद यह मांग पत्र तैयार किया गया है।

ज्ञापन में अनुसूचित जाति-जनजाति विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति राशि में वृद्धि, समयबद्ध भुगतान, उच्च शिक्षा एवं प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विशेष सहायता, कोचिंग एवं छात्रावास सुविधाओं को मजबूत करने की मांग की गई है। साथ ही पदोन्नति में आरक्षण, रोस्टर प्रणाली का पालन, रिक्त पदों पर विशेष भर्ती अभियान तथा संविदा और आउटसोर्सिंग सेवाओं में आरक्षण व्यवस्था लागू करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई।

एसोसिएशन ने अशासकीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों-कर्मचारियों के वेतन भुगतान की स्थायी एवं पारदर्शी व्यवस्था, संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण तथा पुरानी पेंशन योजना (OPS) बहाल करने की मांग की है। इसके अतिरिक्त गोल्डन कार्ड योजना के अंतर्गत प्रभावी एवं कैशलेस स्वास्थ्य सुविधाएं सुनिश्चित करने की बात भी कही गई।

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि नीति निर्धारण, आयोगों, समितियों एवं विभागीय बैठकों में SC/ST समाज और शिक्षक-कर्मचारी संगठनों का प्रभावी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए। साथ ही शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त रखकर मुख्य रूप से शिक्षण कार्य तक सीमित रखने की मांग की गई।

एसोसिएशन ने कहा कि उनकी मांगें केवल शिक्षक-कर्मचारियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सामाजिक न्याय, संवैधानिक समानता, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और कमजोर वर्गों के अधिकारों से सीधे जुड़ी हुई हैं। संगठन ने सरकार से संवेदनशीलता और प्राथमिकता के आधार पर सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की है।

ज्ञापन में चेतावनी दी गई कि यदि मांगों पर समयबद्ध सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से चरणबद्ध जनजागरण और आंदोलनात्मक कार्यक्रम चलाने को बाध्य होगा, जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

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