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टनकपुर, बनबसा बन सकता है ‘हर्बल हब’! जड़ी-बूटी व्यापार से सीमांत क्षेत : में रोजगार की बड़ी उम्मीद

Abid Hussain

Tue, Apr 7, 2026

टनकपुर/चंपावत। भारत-नेपाल सीमा पर स्थित टनकपुर अब जड़ी-बूटी व्यापार के जरिए आर्थिक बदलाव की नई इबारत लिख सकता है। पहाड़ी क्षेत्रों की समृद्ध जैव विविधता और पड़ोसी देश नेपाल से आने वाली दुर्लभ जड़ी-बूटियों की उपलब्धता इस क्षेत्र को हर्बल कारोबार का बड़ा केंद्र बनाने की क्षमता रखती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सुनियोजित प्रयास किए जाएं, तो यह क्षेत्र युवाओं के लिए रोजगार का मजबूत आधार बन सकता है। टनकपुर से जुड़े पहाड़ी क्षेत्रों में औषधीय पौधों की भरपूर उपलब्धता है, वहीं नेपाल के हिमालयी इलाकों से आने वाली बहुमूल्य जड़ी-बूटियां अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊंची कीमत पर बिकती हैं। ऐसे में टनकपुर और बनबसा बॉर्डर क्षेत्र स्वाभाविक रूप से जड़ी-बूटी व्यापार के ट्रांजिट प्वाइंट बन सकते हैं। हालांकि संभावनाएं बड़ी हैं, लेकिन इस क्षेत्र में अभी तक संगठित हर्बल बाजार की कमी है। सीमा व्यापार पर अत्यधिक निर्भरता, अवैध तस्करी और प्रोसेसिंग सुविधाओं का अभाव प्रमुख समस्याएं बनी हुई हैं। इन कारणों से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सीमित रह जाते हैं। यदि जड़ी-बूटी व्यापार को बढ़ावा दिया जाए तो क्षेत्र में कई प्रकार के रोजगार सृजित हो सकते हैं—

1,जड़ी-बूटी की खेती और संग्रहण

2,हर्बल उत्पादों की प्रोसेसिंग यूनिट

पैकेजिंग व ब्रांडिंग उद्योग

3,निर्यात और लॉजिस्टिक्स

4,हर्बल रिसर्च एवं प्रशिक्षण केंद्र

विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों के अनुसार, इस दिशा में ठोस कदम उठाना जरूरी है—

टनकपुर/बनबसा में अंतरराष्ट्रीय स्तर की हर्बल मंडी की स्थापना

●● स्थानीय स्तर पर प्रोसेसिंग यूनिट लगाकर मूल्य संवर्धन

●● किसानों और युवाओं को प्रशिक्षण और सरकारी योजनाओं से जोड़ना

●● नेपाल के साथ संगठित और वैध व्यापार व्यवस्था विकसित करना

●●हर्बल पार्क और वेलनेस सेंटर के जरिए हर्बल पर्यटन को बढ़ावा

बदल सकती है सीमांत क्षेत्र की तस्वीर

जड़ी-बूटी व्यापार को बढ़ावा मिलने से न केवल स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा, बल्कि पलायन पर भी रोक लगेगी। साथ ही टनकपुर की पहचान एक उभरते “हर्बल हब” के रूप में स्थापित हो सकती है।

टनकपुर के पास प्राकृतिक संसाधन, भौगोलिक स्थिति और व्यापारिक संभावनाएं—तीनों मौजूद हैं। जरूरत है इन्हें सही दिशा देने की। यदि सरकार, प्रशासन और स्थानीय लोग मिलकर प्रयास करें, तो आने वाले समय में टनकपुर जड़ी-बूटी व्यापार का प्रमुख केंद्र बनकर आर्थिक विकास की नई मिसाल पेश कर सकता है।

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