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चंपावत जनता दरबार बना इंसाफ़, संवेदना और सामाजिक बदलाव का मंच : डीएम की पहल से टूटे रिश्ते जुड़े, पीड़ितों को मिला भरोसा और राहत

Abid Hussain

Mon, Dec 29, 2025

चंपावत/ जिले में जिलाधिकारी द्वारा आयोजित जनता दरबार अब केवल प्रशासनिक औपचारिकता नहीं, बल्कि इंसाफ़, इंसानियत और सामाजिक सौहार्द का सशक्त मंच बनता जा रहा है। यहां समस्याओं का समाधान सिर्फ़ फाइलों और आदेशों तक सीमित नहीं है, बल्कि वर्षों से जमी पीड़ा, टूटे रिश्ते और निराश चेहरों को नई उम्मीद मिल रही है।

इसका जीवंत उदाहरण हाल ही में फुलेरा गांव से सामने आया, जहां भूमि विवाद में उलझे चचेरे भाई हरिजात फुलारा और हरिदत्त फुलारा पिछले 25 वर्षों से न्यायालयों के चक्कर काट रहे थे। जनता दरबार में दोनों की व्यथा सुनने के बाद जिलाधिकारी ने प्रशासनिक भाषा से हटकर मानवीय और भावनात्मक दृष्टिकोण अपनाया।

उन्होंने कहा“आधी ज़िंदगी कोर्ट-कचहरी में गुज़ार दी, अब आगे और कितना समय लगाओगे। भाई संपत्ति नहीं, विपत्ति में काम आता है।”

रावण और श्रीराम का उदाहरण देते हुए दिए गए इस संदेश का ऐसा असर हुआ कि दोनों पक्ष सुलह के लिए तैयार हो गए। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में दो दिनों के भीतर समझौता कराने का निर्णय लिया गया। वर्षों से टूटा खून का रिश्ता फिर से जुड़ने की राह पर आ गया—यह जनता दरबार की सबसे बड़ी सफलता मानी जा रही है।

■■दिव्यांग, विधवाएं और महिलाएं बनीं सर्वोच्च प्राथमिकता

जनता दरबार में मानवीय संवेदनाओं की मिसाल उस समय देखने को मिली जब धवन गांव की दोनों हाथों से दिव्यांग चंद्रा देवी की पेंशन तत्काल स्वीकृत की गई। साथ ही उनके लिए शौचालय सुविधा और नाले से हो रहे खतरे को देखते हुए प्रोटेक्शन वॉल निर्माण के निर्देश भी दिए गए।

दूरस्थ नीड़ गांव से दूधमुंही बच्ची को गोद में लेकर पहुंचीं विधवा जानकी देवी को आवासीय सुविधा प्रदान की गई। बड़ी संख्या में महिलाएं छोटे बच्चों के साथ अपनी समस्याएं लेकर जनता दरबार में पहुंचीं। जिलाधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि“दिव्यांगों, वृद्धों और महिलाओं की समस्याएं मेरी सर्वोच्च प्राथमिकता हैं।”

■■ भावुक कर देने वाले दृश्य

नागनाथ वार्ड की एक अत्यंत गरीब और शारीरिक रूप से कमजोर महिला की वर्षों पुरानी पेयजल समस्या का समाधान होते ही वह भावुक होकर जिलाधिकारी के पैरों में गिर पड़ी। यह दृश्य वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम कर गया। जाते-जाते महिलाओं, बुजुर्गों और जरूरतमंदों ने जिलाधिकारी को दिल से आशीर्वाद दिया।

“मसीहा” की संज्ञा

चंपावत जिले में जिलाधिकारी की इस कार्यशैली के चलते लोग उन्हें अब केवल अधिकारी नहीं, बल्कि मसीहा के रूप में देखने लगे हैं। जनता दरबार में मामलों का त्वरित, संवेदनशील और न्यायपूर्ण निस्तारण प्रशासन के प्रति आमजन का भरोसा मजबूत कर रहा है।

निष्कर्ष

चंपावत का जनता दरबार आज प्रशासन और जनता के बीच एक सेतु बन चुका है—जहां कानून के साथ करुणा, आदेशों के साथ अपनापन और फैसलों के साथ इंसानियत दिखाई देती है। यही कारण है कि जिलाधिकारी की यह पहल जिले में सकारात्मक बदलाव की मिसाल बन रही है।

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दमदार मिसाल

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