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गरीबी नहीं बनी बाधा, मनिहारगोठ के तीन बेटों ने अग्निवीर बन रचा इतिहास

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रिपोर्ट : आबिद सिद्दीकी : गरीबी नहीं बनी बाधा, मनिहारगोठ के तीन बेटों ने अग्निवीर बन रचा इतिहास

Abid Hussain

Sun, May 31, 2026

■■ ऑटो चालक, सब्जी विक्रेता और प्राइवेट नौकरी करने वाले परिवारों के बेटों ने भारतीय सेना में पाई जगह, क्षेत्र का बढ़ाया मान

टनकपुर/चंपावत। कहते हैं कि सफलता संसाधनों की मोहताज नहीं होती, बल्कि मेहनत, लगन और हौसले की पहचान होती है। इसे सच साबित कर दिखाया है ग्राम पंचायत मनिहारगोठ के तीन होनहार युवाओं ने, जिन्होंने आर्थिक चुनौतियों के बावजूद भारतीय सेना की अग्निवीर भर्ती में चयनित होकर पूरे क्षेत्र का नाम रोशन कर दिया है।

गांव के फरदीन, मोहम्मद अरीब और मोहम्मद कैफ का अग्निवीर योजना के अंतर्गत चयन हुआ है। इन तीनों युवाओं की सफलता इसलिए भी खास है क्योंकि वे साधारण परिवारों से आते हैं और उनके माता-पिता ने कठिन परिस्थितियों में मेहनत-मजदूरी कर उनका पालन-पोषण किया।

फरदीन पुत्र इंतजार अली का चयन अग्निवीर टेक्निकल पद पर हुआ है। उनके पिता ऑटो चालक हैं, जिन्होंने दिन-रात मेहनत कर बेटे की शिक्षा और सपनों को पंख दिए। फरदीन ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा मदरसा हुसैनिया प्राइमरी स्कूल मनिहारगोठ से प्राप्त की तथा आगे की पढ़ाई महात्मा गांधी राजकीय मॉडर्न उच्च प्राथमिक विद्यालय और जीआईसी सैलानीगोठ से पूरी की।

वहीं मोहम्मद अरीब पुत्र शम्सुद्दीन का चयन भी अग्निवीर टेक्निकल पद पर हुआ है। अरीब के पिता परिवार के भरण-पोषण के लिए दूसरे प्रदेश में प्राइवेट नौकरी करते हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद अरीब ने मेहनत और समर्पण से यह उपलब्धि हासिल की। उन्होंने अपनी शिक्षा जीआईसी सैलानीगोठ से प्राप्त की।

इसके अलावा मोहम्मद कैफ पुत्र मुनव्वर अली का भी अग्निवीर में चयन हुआ है। कैफ के पिता सब्जी बेचकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। आर्थिक कठिनाइयों के बीच कैफ ने अपने लक्ष्य से कभी समझौता नहीं किया और आज अपनी मेहनत के दम पर सेना में जगह बनाकर परिवार और क्षेत्र का नाम रोशन किया है।

तीनों युवाओं की सफलता से पूरे मनिहारगोठ क्षेत्र में खुशी का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि इन युवाओं ने साबित कर दिया है कि यदि इरादे मजबूत हों तो गरीबी और अभाव भी सफलता की राह नहीं रोक सकते। गांव के लोगों ने चयनित युवाओं और उनके परिवारों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

मनिहारगोठ के इन तीन सपूतों की सफलता आज क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है। कठिन परिस्थितियों में पले-बढ़े इन युवाओं ने यह संदेश दिया है कि मेहनत, संघर्ष और आत्मविश्वास के बल पर कोई भी मंजिल हासिल की जा सकती है।

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दमदार मिसाल

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