कलाम के सपनों से प्रेरित हुई युवा शक्ति, विधिक जागरूकता शिविर में दिया : सशक्त भारत का संदेश
Abid Hussain
Thu, Oct 15, 2026
■■ टनकपुर के एपीजे अब्दुल कलाम इंजीनियरिंग कॉलेज में मनाई गई भारत रत्न डॉ. कलाम की जयंती, विद्यार्थियों को अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति किया जागरूक
टनकपुर, 15 अक्टूबर। “सपने वे नहीं होते, जो नींद में आते हैं, सपने वे होते हैं, जो खुली आंखों से देखे जाते हैं।” भारत रत्न एवं पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के इन प्रेरणादायी विचारों के साथ गुरुवार को टनकपुर स्थित एपीजे अब्दुल कलाम इंजीनियरिंग कॉलेज में उनकी जयंती मनाई गई। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण चंपावत के सचिव के दिशा-निर्देशों के अनुपालन में आयोजित विधिक जागरूकता शिविर में विद्यार्थियों को कानूनी अधिकारों, शिक्षा के महत्व और समाज के प्रति जिम्मेदारियों की जानकारी दी गई। कार्यक्रम में युवा शक्ति को राष्ट्र की असली ताकत बताते हुए विकसित, सशक्त और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया गया।
कार्यक्रम का नेतृत्व बाह्य न्यायालय टनकपुर की सिविल जज जूनियर डिवीजन रुचिका नरूला ने किया, जबकि अध्यक्षता कॉलेज के प्रधानाचार्य प्रो. हरद्वारी लाल मंडोरिया ने की। इस दौरान न्यायिक अधिकारी, अध्यापक, छात्र-छात्राएं, पराविधिक स्वयंसेवक (पीएलवी), पुलिस विभाग की टीम और गणमान्य लोग मौजूद रहे।
■■ शिक्षा, विज्ञान और जागरूकता से बनेगा सशक्त भारत
सिविल जज जूनियर डिवीजन रुचिका नरूला ने डॉ. कलाम के जीवन और विचारों से प्रेरणा लेने का संदेश देते हुए कहा कि शिक्षा से सशक्त समाज, विज्ञान से समृद्ध भारत, स्वच्छता से स्वस्थ जीवन और अधिकारों से समान अवसर की दिशा में आगे बढ़ना आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों को जागरूकता का महत्व समझाते हुए कहा कि अपने अधिकारों और कर्तव्यों की जानकारी रखने वाला नागरिक ही एक बेहतर समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। डॉ. कलाम के आदर्शों को अपनाकर देश के विकास में योगदान देना युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है।
■■ अखबार बेचकर पढ़ाई की, मेहनत से बने देश की अनमोल धरोहर
पीएलवी अधिकार मित्र बिजेंद्र अग्रवाल ने डॉ. कलाम के संघर्षपूर्ण जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि साधारण परिवार में जन्मे कलाम ने सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को कभी मरने नहीं दिया। अखबार बेचकर अपनी पढ़ाई जारी रखने वाले कलाम ने मेहनत, लगन और दृढ़ संकल्प के बल पर देश और दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई।
उन्होंने बताया कि 15 अक्टूबर 1931 को जन्मे डॉ. कलाम ने सेंट जोसेफ कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई की और मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) में महत्वपूर्ण योगदान दिया। भारत के पहले उपग्रह प्रक्षेपण यान एसएलवी-3 के विकास और रोहिणी उपग्रह को अंतरिक्ष में स्थापित करने के अभियान में उनकी अहम भूमिका रही। अग्नि और पृथ्वी जैसी मिसाइलों के विकास में योगदान के कारण उन्हें ‘मिसाइल मैन ऑफ इंडिया’ के नाम से जाना गया।
उन्होंने बताया कि वर्ष 1998 में पोखरण परमाणु परीक्षणों में भी डॉ. कलाम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वर्ष 2002 में वह भारत के राष्ट्रपति बने और देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किए गए। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, दृढ़ इच्छाशक्ति और शिक्षा के बल पर सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचा जा सकता है।
■■ युवाओं को दिया सपने देखने और उन्हें साकार करने का संदेश
शिविर में विद्यार्थियों को प्रेरित किया गया कि वे डॉ. कलाम के विचारों को अपने जीवन में अपनाएं और शिक्षा, अनुशासन, वैज्ञानिक सोच तथा सामाजिक जागरूकता को अपनी ताकत बनाएं। कार्यक्रम के माध्यम से विधिक जागरूकता का संदेश देते हुए विद्यार्थियों को अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने और दूसरों को भी जागरूक करने के लिए प्रेरित किया गया।
इस अवसर पर बाह्य न्यायालय के प्रशासनिक अधिकारी राजन, हिमांशु, गणेश बोहरा, पुलिस विभाग के कर्मचारी, विद्यालय के अध्यापक तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में पीएलवी अजय गुर्रानी, अमित कुमार, राजेंद्र प्रसाद, कुंवर सिंह भंडारी, बिजेंद्र अग्रवाल, दिग्विजय सिंह तड़ागी, किरन गहतोड़ी, किरन जोशी, शमशाद बानो, राधिका अधिकारी, सुनील कुमार, अनिल कुमार, प्रमोद कुमार, अंजू बोहरा, कमला जोशी और सुनीता टम्टा सहित प्रो बोनो पीएलवी इजहार अली व सोनी जहां मौजूद रहे।
डॉ. कलाम की जयंती पर आयोजित इस कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को यह संदेश दिया कि बड़े सपने, निरंतर मेहनत, शिक्षा और जागरूकता ही राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की नींव हैं।
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